Safalta Ki Kahani In Hindi

Safalta Ki Kahani In Hindi

Safalta Ki Kahani In Hindiसफलता की कहानी– एक असफल आदमी अपनी असफलता के लिए हजारों बहाने बना सकता है। आपको हजारों बहाने गिना सकता है। और कई बार हम भी ऐसा ही करते है। हम भी बहाने देते रहते है। कई बार Excuse बनाते रहते हैं।
लेकिन आज जो में कहानी आप सबको बताने जा रहा हूं। वो एक ऐसी लड़की की कहानी है। जिसकी ज़िन्दगी में आम लोगों से कहीं ज्यादा परेशानियां थी। आम लोगों से कहीं ज्यादा तकलीफे थी।
लेकिन उसने अपनी सारी बाधाओं को और अपनी तकलीफों को पार किया। और दुनिया में अपना नाम रोशन किया। Safalta Ki kahani In Hindi.

तो में जिस लड़की की कहानी आप लोगों को बताने जा रहा हूं। उनका नाम है Wilma Rudolph. जिनका जन्म अमेरिका के टेनिसी राज्य में हुआ था। विलमा का जन्म बहुत ही गरीब परिवार में हुआ था। जो अश्वेत परिवार से थी।
उनके पिता माली थे और उनकी माता लोगों के घर-घर जाकर काम किया करती थी। अब आप खुद सोचिए एक लड़की जो कि बहुत गरीब थी और अश्वेत थी। और वो भी जब जिस समय अमेरिका में श्वेत-अश्वेत के बीच भेद-भाव चल रहा था। और सबसे बड़ी बधा विलमा के जीवन की ये थी। की वह बचपन से ही बहुत ज्यादा बीमार रहा करती थी। और ढाई साल की उम्र में विलमा को पोलियो होगया।


धीरे-धीरे वीलमा को अपने पैर महसूस होना बंद होगया। लेकिन Wilma की मां ने हार नहीं मानी। वो विलमा को बार बार प्रेरित करती रही। उनकी माता ने लोगों के घर जाकर काम करना बंद कर दिया। और विलमा का इलाज करना शुरू कर दिया। वो हफ्ते में दो बार विलमा को 50 मिल दूर के एक हस्पताल में लेकर जाया करती।

Sangharsh Se Safalta Ki Kahani in Hindi

क्युकी एक मात्र वही हस्पताल था जो अश्वेतों का इलाज किया करता था। और अच्छा हस्पताल था और बाकी के पांच दिन विल्मा की मां खुद उनका इलाज किया करती थी। और धीरे धीरे उनके जज्बे की बदौलत पांच साल की उम्र में आते आते विलमा के अंदर सुधार होने लगे। विलमा अब ब्रेस पहन कर चला करती थी।

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डॉक्टर ने इन कहा था के विलमा बिना ब्रेस के नहीं चल सकती। विलमा चोट बच्चो को खेलते हुए देख कर कहती थी। की मां में भी ऐसे ही दौड़ना चाहती हूं। और उसकी मा उसे हमेशा प्रेरित किया करती थी। की बेटा तुम जरूर दौड़ोगी। 11 साल की उम्र में विलमा ने पहली बार ब्रेस उतार कर बास्केट बॉल खेला। (kahani Hindi mein safalta ki)

और ये देख कर उनके डॉक्टर बड़े ही आश्चर्यचकित रह गए। उन्होंने विलमा को दौड़ कर चलने को कहा। और विलमा थोड़ी देर दौड़ने के बाद गिर गई। डॉक्टर ने उन्हें गेक लगा लिया और कहा तुम दौड़ोगी। और सबसे तेज दौड़ोगी। विलमा ने ये बात अपने दिल में बिठा ली। और कहा में सबसे तेज दौड़ूंगी।

Motivation ki Kahani In Hindi

विल्मा के इस जज्बे और जुनून को सभी ने सपोर्ट किया। उनकी मां ने उनका पूरा साथ दिया। उनके पूरे स्कूल ने उनका पूरा साथ दिया। उनके कोच ने उन्हें सपोर्ट किया और उन्होंने पहली बार पार्टिसिपेट किया। लेकिन वह आखरी स्थान पर रही। पर उनका आत्म विश्वास बिल्कुल भी कम नहीं हुआ। उनके अंदर और Motivation आया उनके अंदर और जुनून आया। और वो दिन आ होगया।

Hindi mein Kahani Safalta ki

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Wilma Rudolph at Olympic.

Safalta Ka Ek Chehra Jisne rachi Kahani Hindi mein ki Kar diya Roshan Naam.

1960 को रोम ओलंपिक में अमेरिका निधित्व करते हुए विलमा ने 100 मीटर 200 मीटर और 400 मीटर तीनों प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता। और पहली अश्वेत महिला बनी जिन्होंने ने ये मेडल जीता।


क्या अभी भी आपको अपनी बाधाएं बड़ी लग रही हैं। जब भी आपकी लाइफ में प्रॉब्लम आए तो आप इस कहानी को पढ़ सकते है। कितनी बड़ी प्रॉब्लम विलमा ने फेस कि। कितनी सारी दिक्कत उन्होंने पार की दुनिया में अपना नाम रोशन किया। एक इंसान का जज्बा एक इंसान का जुनून आदमी को कहीं भी के जा सकता है।

Summary

एक इंसान के अंदर इतनी ताकत होती है कि वह कुछ भी कर सकता है। बस आपको डिसाइड करने की जरूरत है। हिम्मत बनाए रखने की जरूरत है। और फ्र आप चाहे जो भी हो उस मुकाम तक पहुंच जाएंगे। (Sangharsh Se Safalta Ki Kahani in Hindi)

Is kahani se hume ye seekhne ko milta hai. Chahe kuch bhi ho jaaye, kaisi bhi paristhiti ho. Hume haar nahi maan ni chahiye. Wilma Rudolph ji ki tarah jab ki unki preshaniya to kahi guna jyada thi. To last mein yahi kehna chahuga ki kabhi haar mat maane. Aur kahani achi lage to Share Kijiye. Safalta Ki kahani Hindi Mein.

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